Letter written on 29 Oct 1968: Difference between revisions

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प्यास जहां पूर्ण होती है, वहीं उस प्रियतम से मिलाम होजाता है।
प्यास जहां पूर्ण होती है, वहीं उस प्रियतम से मिलन होजाता है।





Latest revision as of 15:43, 2 May 2024

This letter is dated 29th Oct 1968 and addressed to Ma Dharm Jyoti, then known as Pushpa. It is not known to have been previously published.

ACHARYA RAJNISH

115, NAPIER TOWN : JABALPUR (M. P.)

प्यारी पुष्पा,
प्रेम। तेरा प्यास से भरा हुआ पत्र मिला है।

आह! ऐसी प्यास शुभ है -- ऐसी प्यास सौभाग्य है।

क्योंकि, प्यास की तीव्रता ही प्रभु तक पहुँचने का सेतु है।


प्यास जहां पूर्ण होती है, वहीं उस प्रियतम से मिलन होजाता है।


वहां सबको मेरे प्रणाम।

क्या नारगोल नहीं आरही है?

रजनीश के प्रणाम

२९/१०/१९६८


See also
Letters to Ma Dharm Jyoti ~ 10 - The event of this letter.